बबम बम बबम (बुरा न मानो होली की बोली है )
शनिवार, 27 फ़रवरी 2010
जय भड़ास जय जय भड़ास
अपनी भड़ास को सीधे ही अपने ई-मेल द्वारा इस पते पर भेजिये bharhaas.bhadas@blogger.com
भड़ासी अपने चिट्ठों को यहां भड़ास के अपने एग्रीगेटर पर सूचीबद्ध करें अपने चिट्ठे का URL सीधे ही हरे रंग के प्लस(+)के चिन्ह पर क्लिक करके जोड़िये
त्योहार आए नहीं कि हम सारे लोग एक दूसरे को दे दनादन उस पर्व की शुभकामनाएं देना शुरू कर देते हैं। अच्छी बात है लेकिन जिन नैतिक मूल्यों के लेकर ये पर्व या त्योहार शुरू हुए थे क्या वे आज भी जिंदा हैं या बस हम सब खोखली हो चुकी परंपराओं को निभाये चले जा रहे हैं? कल होली और ईद मिलादुन्नबी है आजकल के माहौल में बस परंपराओं के खोल रह गये हैं अंदरूनी नैतिक भावनाएं और सौहार्द तो गुम हो गया है सारा सौहार्द और प्रेम तो वेलेन्टाइन डे या ऐसे ही अजीब से दिन पर दिखता है मुझे अभी तक आश्चर्य है कि भारत देश के "इंडियन्स" ने अब तक ’हैलोवीन’ मनाना शुरू क्यों नहीं करा है?
मेहरबानी करके होली नशा करके बेहूदा हरकतें करने का बहाना मत तलाशिये और ईद पर साम्प्रदायिक दंगा हो ऐसा माहौल टालिये चाहे कुछ भी हो अपनी ऊर्जा सकारात्मक बनाए रखिये। खुश रहिये और सबको खुश रखने का प्रयास करिये।
जय जय भड़ास
© भड़ास भड़ासीजन के द्वारा जय जय भड़ास२००८
Back to TOP