हरकीरत मैडम जी भड़ास का डा.रूपेश श्रीवास्तव भी एक काल्पनिक पात्र है मुखौटों का मेला लगा हुआ है

शनिवार, 11 अप्रैल 2009

मैं डा.रूपेश श्रीवास्तव हरकीरत मैडम(???? पता नहीं कि मैडम हैं या एडम या फिर कोई हिजड़ा मनीषा दीदी जैसा) को बता रहा हूं कि मुनव्वर सुल्ताना क्या और क्या कोई लैंगिक विकलांग मनीषा या ऐसी पच्चीसों ...... ये सब मैं ही तो हूं; इन सबका कोई अस्तित्व नहीं है ये सभी काल्पनिक हैं दरअसल सच तो ये है कि डा.रूपेश श्रीवास्तव भी एक काल्पनिक पात्र है जिस पर पच्चीसों लोग खुद अपने आपको होने की घोषणा लिख कर दुनिया के सामने कर चुके हैं। चूंकि ये एक ऐसा नाम और एकाउंट है जिसे अधिकांश भड़ासी इस्तेमाल करते हैं यहां तक कि मैं भी..... मेरा तो कोई नाम नहीं है मैं आप लोगों की तरह नहीं हूं बेनाम हूं अनाम हूं गुमनाम हूं लेकिन शायद हूं जरूर इसलिये लिखता हूं चेहरा नहीं है अस्तित्व नहीं है व्यक्तित्व नहीं है तो मुखौटा लगाने का आधार भी नहीं है।
हरकीरत हक़ीर को एक छोटा सा टिप्पणा नज़र करके आया हूं आप सब भी देखिये, मुखौटों का मेला लगा हुआ है ..............
आदरणीय हरकीरत जी कहने में जो हिचकिचाहट आपने उपजा दी है सो न ही कहूं तो शायद सहज हो सकूंगा वो इसलिये कि खुद एक छद्मवेशधारी जो मुझे ये कह रहा है कि मैं मुनव्वर सुल्ताना के बुर्के में छिप कर कुछ कर रहा हूं और आप उस जड़बुद्धि से सहमति जता रही हैं तो मुझे उस गलीज़ के साथ आपकी भी बुद्धि पर तरस आने लगा है कि कितना हलका वजन है आपकी सोच का....
मैडम जी डा.रूपेश श्रीवास्तव ने आज तक कोई काम छिप कर नहीं करा वरना आप लोगों की शराफ़त की कतार में सबसे आगे बैठा होता। डा.रूपेश श्रीवास्तव का एक ही रूप है और वो है भड़ास जो कि आप सबके सुन्दर मुखौटों से ज्यादा बदसूरत लग सकता है जिसकी मैंने कभी परवाह नहीं करी। मुनव्वर सुल्ताना कब की बुर्के से बाहर आ चुकी हैं लेकिन आप अपने "महिला"पन नापने का न जाने कौन सा पैमाना लेकर ये नाप रही हैं कि वो सब मेरा लिखा है। गलती से भड़ास पर जाइये तो आपको पता चल जाएगा कि डा.रूपेश श्रीवास्तव एक इंसान नहीं है ये कम से कम पच्चीस लोगों ने लिखा है कि वे हैं डा.रूपेश श्रीवास्तव.... भड़ास के मंच पर महिला पुरुष और हिजड़े सभी लिखते हैं भड़ास इन सबसे कब का मुक्त हो चुका है जो ये नहीं चाहते कि सड़ी-गली परंपराए टूटें या महिलाएं बुर्के से बाहर आएं या इनके घरों में जन्में हिजड़े बच्चे तालियां बजा कर भीख मांगना छोड़ कर आप शरीफ़ों के साथ आएं तो आपको मुबारक हो आपकी बौद्धिकता हमें तो हमारी कुंठाएं,गंवारूपन,भदेसपन और ओछापन ही सही लगा। समीर लाल जी को बताना है कि जब मनीषा नारायण ने अर्धसत्य ब्लाग बना कर मेरे सहयोग से लिखना शुरू करा तो इनकी करुणा का मुखौटा सामने न आया लेकिन जब गुरूदेव ने सारथी पर हिजड़ो पर कलम चलाई हमें निर्देशित करने के लिये तो पहुंच गए सहानुभूति के श्लोक पढ़ने, हिन्दी का कोई भी ब्लागर अगर खांसी या छींक पर भी लिखे तो जनाब की टिप्पणी पहुंच जाती है पर हिजड़ा कैसे लिख सकता है वो भी ब्लागर बनकर.... महाराज मुखौटा कभी व्यक्तित्व का हिस्सा नहीं बनता ये आप भली प्रकार जानते हैं लेकिन क्या करें मजबूरी है कि इस बात पर एक लाइन लिखने से काम नहीं चलेगा तो किचकिचा कर बौद्धिक शब्दप्रपंच कर डाला। बेटा राजेश स्वार्थी भड़ास के बारे में जानने के लिये तुम्हें इंटरनेट पर अभी ब्लागिंग के बारे में बहुत कुछ जानना बाकी है खाली ब्लाग बना लेने से कुछ नहीं होता कंटेंट डालना पड़ता है भले चोरी का ही डालो:)बच्चे भड़ास स्पष्टवादिता में मुंहफ़ट होने की हद से आगे है दुनिया सबसे कुख्यात हिंदी ब्लाग है कभी गलती से किसी सर्च इंजन को इस्तेमाल कर लेना। अरविंद मिश्रा जी आप जिस टीम के सिरमौर हैं उसके सचिव जी से मेरे बारे में और भड़ास के बारे में जान लीजियेगा मैं वही हूं जो आयुषवेद नाम की दुकान ब्लागिंग के क्षेत्र में मुफ़्त में चला रहा हूं,खुद ही समझ जाएंगे कि मेरी सोच क्या है। मैडम जी आप कहती हैं कि हमने इस मोहतरमां को माफ़ किया ...कृपया इनसे कहिये दोबारा मेरे ब्लॉग का रुख न करें ...!! आपको मुझ उजड्ड की ओर से बिनमांगी सलाह है कि आप सिर्फ़ खास पाठकों के लिये ही सेटिंग में जाकर अपने ब्लाग को जमा लें ताकि हम जैसे गंदे लोग न आ सकें।
हरी जोशी जी तो पता नहीं किस दुनिया में रमण करते हैं कि यशवंत सिंह का मुखौटा नोच कर ही भड़ासियों ने उन्हें उनके ब्लाग का नाम ही बदल देने पर मजबूर कर दिया,भड़ास उस ब्लाग का नाम है जिसे हम सब चलाते हैं जिसका URL http://www.bhadas.tk है हम भड़ासियों ने हिंदी ब्लागिंग में यू आर एल बदल कर पहले इसे bharhaas.blogspot.com बनाया फिर उसे पुराने परिचय पर लौटाने के लिये नए स्थान पर डाइवर्ट करा,इस डाके के लिये बड़ी मशक्कत करनी पड़ी लेकिन इतनी बड़ी करतूत किसी ब्लागर ने न देखी न ही किसी ने.... शराफ़त अलियों के सिरमौर यशवंत सिंह बकौल अविनाश वाचस्पति उस पाखंडी का मेल आई डी दे रहे हैं,क्या होगा इससे? अरे भाई उसका पाखंड खुल जाएगा कि उसने क्या करा था भड़ास और भड़ासियों के साथ? क्या कारण है कि उसे अपने ब्लाग का नाम भड़ास से बदल कर भड़ासblog करना पड़ा???मामले को भड़ास पर प्रकाशित करना धमकी नहीं है वो एक कम्युनिटी ब्लाग है जिसके स्वप्न जी भी सदस्य हैं पूछ लीजिये उनसे और मनु बाबू भड़ास के दूसरे माडरेटर रजनीश के.झा से बड़ा गहरा प्रेम जताते नहीं थकते। अगर कभी आपमें से कोई शारीरिक तौर पर अस्वस्थ महसूस करे और लगे कि मैं बुरा आदमी होने के साथ एक अच्छा चिकित्सक हूं तो निःसंकोच संपर्क करें, इस बुरे आदमी में अगर आप अच्छे लोग चाहें तो अच्छाइयां तलाश सकते हैं लेकिन मुखौटे में न आएं।
जय जय भड़ास

2 टिप्पणियाँ:

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

गुरुवार,

जिनलोगों के नाम आपने गिनाये हैं सभी मुखौटेधारी हैं.
बस वाह वाह और बहुत खूब कहना जानते हैं,

कविता कहानियाँ और संगोष्टी से इतर आम जन से ना कभी इनका सरोकार रहा है और ना है होगा, महिला सुंदर होनी चाहिए कुत्ते की तरह लार टपकाने वालों की फौज है ये.

चलिए हम भड़ास भड़ास जारी रखते हैं.

जय जय भड़ास

हिज(ड़ा) हाईनेस मनीषा ने कहा…

भाई कुछ समय से बाहर गयी हुई थी इसलिये पेज पर न आ सकी लेकिन भड़ास तो हम सब जिंदगी में जीते हैं। सुंदर तो मैं भी हूं,भूमिका,देवी,श्रेया, दिव्या और रम्भा अक्का भी मैं और रम्भा अक्का मुंबई में हमारे ब्यूटी कान्टेस्ट में पहले स्थान और रनर अप मे स्थान पर रह चुके हैं कई साल तक... लेकिन मजबूरी है कि बस महिला या पुरुष होने का इन शरीफ़ों की तरह सौभाग्य नहीं है। टांगों के बीच बस प्रजनन होता है लेकिन इंसानी दुनिया तो दिल और आपसी प्रेम से चलती है तो वो मैंने आप सबके बीच भरपूर आदर और सम्मान के साथ पाया है बल्कि हम सभी ने.... भड़ास ने जाति धर्म भाषा क्षेत्र के साथ साथ लैंगिकता के बंटवारे की दीवार भी गिरा दी है। मुखौटे नोचने का अभियान जारी रहेगा।
जय जय भड़ास

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