कसाब...कसाब...कसाब और भड़ास का मंच

रविवार, 26 जुलाई 2009

जरा ध्यान दीजिये इन सारी बातों पर.......
मुंबई पर आतंकी हमले के आरोपी अजमल कसाब को आर्थर रोड जेल में स्थानांतरित किए जाने के बाद महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ मंत्री ने उससे जेल में मुलाकात की थी। यह जानकारी गृह विभाग से जुड़े भरोसेमंद सूत्रों ने दी है। इनके मुताबिक, इस मंत्री ने पुलिस महकमे के आला अफसरों को इस बारे में सूचित किया था। कसाब से मुलाकात के दौरान मंत्री ने अपनी पहचान भी उससे छिपाई थी।सूत्रों के अनुसार, जेल में सुरक्षा इंतजामों का जायजा लेने आए इस मंत्री ने कसाब को बताया था कि उसका देश पाकिस्तान उसे अपना नागरिक मानने को तैयार नहीं है। यह सुनने के बाद कसाब के चेहरे पर चौंकाने वाले भाव थे। मुंबई आतंकी हमलों के मुख्य आरोपी आमिर अजमल कसाब ने बुधवार को स्पेशल कोर्ट में कहा कि मुझे दुनिया वाले ही सजा दें। कसाब का कहना था कि उसका बयान किसी दबाव में नहीं दिया गया है। उन्होंने गुनाह किसी के दबाव में नहीं कबूला है।उसने कहा कि मेरे गुनाह की सजा खुदा भी माफ नहीं कर सकता और मेरी सजा यही है कि मुझे फांसी दे दी जाए। इसके पहले कसाब ने कोर्ट में कहा था कि उसे अपना गुनाह कबूल है और उसे जल्द से जल्द सुनवाई कर सजा दे दी जाए। मुंबई पर पिछले साल 26 नवंबर को हुए आतंकी हमले के आरोपी अजमल कसाब ने हमले संबंधी क्लोज सर्किट टीवी फुटेज वाली सीडी की मांग की, जिसे विशेष अदालत ने ठुकरा दिया। वकील अब्बास काजमी के मुताबिक, ‘कसाब के दिमाग में विचित्र विचार आते रहते हैं। मुझे पूरा भरोसा नहीं है कि वह सीडी शब्द का मतलब भी जानता होगा।’ पिछले हफ्ते कसाब ने विशेष कोर्ट से कहा था कि वह एक पत्र मक्का भेजना चाहता है। अभियोजन पक्ष ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान छह गवाहों से पूछताछ की थी। इसके बाद अभियोजन ने कसाब तथा उसके साथी अबू इस्माइल द्वारा सीएसटी के समीप हमले के सीसीटीवी फुटेज दिखाने का आग्रह किया था। काजमी ने इस आग्रह पर आपत्ति जताई। जब कसाब ने फुटेज की सीडी मांगी तो विशेष जज एमएल टाहिलियानी ने उससे पूछा कि वह क्यों यह सीडी चाहता है।तब कसाब ने कोई जवाब नहीं दिया। जज ने कसाब से यह भी पूछा कि क्या उसके पास जेल में सीडी प्लेयर है तो उसने नकारात्मक उत्तर दिया। इस पर जज ने कहा कि कसाब को सीडी देने से कोई मतलब नहीं निकलेगा, क्योंकि उसके पास उसे देखने का कोई साधन नहीं है।
आप इन सारी बातों का क्या मतलब समझ पा रहे हैं? इस पूरी अदालती प्रक्रिया का क्या अर्थ निकल रहा है? कौन किसे बेवकूफ़ बनाने की कोशिश कर रहा है? जनता तो रेडीमेड है आप सबका अब्बास काज़मी और अजमल कसाब के बारे में क्या ख्याल है और ये मंत्री कौन है जो कि जीजाजी से मिलने गया था कहीं ये राष्ट्र ससुर तो नहीं बनना चाहता?????? हजारों सवाल और बस एक भड़ास का मंच...........
जय जय भड़ास

2 टिप्पणियाँ:

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

संदीप भाई,बहुत सारे सवाल खडे़ हैं लेकिन हमारी लोकतांत्रिक जनता क्रिकेट मैच देखती है सिनेमा देखती है जाति-धर्म की बातों पर लड़ती है एक दूसरे के घर जलाती है। हमें अगर स्थिति बदलना है तो खुद ही प्रयास करना होगा। मैं अहमदाबाद से बस अभी वापिस आया हूं। आजकल तो भड़ास की स्थिति ये है कि लोग देखते हैं लेकिन लिखने का साहस नहीं करते जबकि अब तो सीधे ही पोस्ट करी जा सकती है पुराने सक्रिय भड़ासियों को मैंने कह रखा है कि जरा नब्ज देखनी है तो आप लोग कुछ समय शान्त रहिए। लेकिन आप देख रहे हैं कि क्या हो रहा है?
जय जय भड़ास

अजय मोहन ने कहा…

संदीप भाई एक अरसे बाद आए हैं आप भड़ास के नए बंदे तो आप से परिचित भी नहीं होंगे इसलिये इस आग को शायद धीमी लपटों वाला समझेंगे। आपको याद होगा डा.साहब की पुरानी पोस्ट "काय करायचे" जिसमें उन्होंने आपका जिक्र करा था। बढिया पेला है इसी तरह पेट्रोल-डीजल उड़ेलते रहिए। अब्बास काजमी की तो अम्मा दादी नानी की तो...*()ऽ‍(*)_()(*‍)+)ऽ%‍॓
जय जय भड़ास

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