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उत्सव शर्मा को क्यों नहीं मार डाला गया राहुल राज की तरह..??

बुधवार, 26 जनवरी 2011

उत्सव शर्मा कौन है ये तो हर वो आदमी जानता है जो कि टीवी के खबरिया चैनल देखता है या फिर अखबार पढ़ता है। ये वो नौजवान है जिसने कुछ समय पहले रुचिका गिरहोत्रा कांड में अभियुक्त राठोड़ पर खुलेआम हमला कर के उसे जख्मी कर दिया था। बनारस का रहने वाला ये बंदा कोई अनपढ़ जाहिल या पागल नहीं है इसने फ़ैशन डिजानिंग का अध्ययन करा है लेकिन जब कुंठा अतिरेक एकत्र हो जाए तो एक मासूम किस कदर विस्फोटक हो सकता है ये हमारे सिस्टम को समझ नहीं आ रहा है कि क्यों एक बार फिर न्याय प्रक्रिया में विलंब और अनिर्णीत सी स्थिति के चलते एक बार फिर इस जमानत पर छूटे नौजवान ने कोर्ट परिसर में ही आरुषि तलवार के पिता डा.राजेश तलवार के ऊपर गंडासे से हमला कर दिया?असल बात ये है कि इस मनोस्थिति में तो देश के लाखों जवान हैं जो कि न्यायप्रक्रिया के ढिलंगरपन से तंग आ चुके हैं और ये हमला अभियुक्तों पर करके न्यायपालिका के ठेकेदार बने जजों तक ये बात पहुंचाना चाहते हैं कि यदि वो ज़द में आ गये तो ये हमला उनपर होगा।
राहुल राज को मौके पर ही जान से मार दिया गया लेकिन अजमल कसाब को दामाद बना कर रखा है दो साल से ऊपर हो गए। राहुल राज तो मात्र राज ठाकरे से बात करना चाहता था लेकिन अजमल कसाब ने तो पौने दो सौ लोगों को सीधे ही मार डाला जाहिर सी बात है कि राहुल राज बड़ा अपराधी था इसलिये मौके पर ही मार देना उचित रहा होगा हमारी न्यायप्रक्रिया में तभी तो न्यायापालिका ने इस बात की जांच की मांग करते राहुल के परिवार की बात अनसुनी कर दी(हमारे प्यारे देशवासी भूल गए होंगे इस जवान को क्योंकि भूलने की बेहतरीन आदत है) उत्सव शर्मा को पगला कह कर जेल में डाल देंगे या मनोचिकित्सालय भेज देंगे जिधर वह घिस घिस कर मरेगा।
सिस्टम अभी भी नशे में है जब कुछेक जज और नेताओं को ऐसे नौजवान सीधे जहन्नुमरसीद कर देंगे तब नशा फटेगा।
जय जय भड़ास

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जैन अल्पसंख्यक हैं या राक्षस ये मुद्दा सामाजिक है या न्यायायिक???

गुरुवार, 20 जनवरी 2011

प्रवीण शाह जी पधारे इसके लिये आश्चर्य सहित आभार लेकिन क्या आप स्वामी असीमानंद या अजमल कसाबों के दिमागों में चलते अनर्गल विचारों को विमर्श का मुद्दा बना कर मात्र बहस करना चाहेंगे? विधि सम्मत नियम किसलिये बनाए जाते हैं ताकि जनसामान्य को ये समझ आ सके कि देश किस व्यवस्था के अंतर्गत चलता है और नागरिक हित क्या हैं न कि बस ब्लाग पर एक दूसरे के विचार जान लेने से और उसे उचित या अनर्गल ठहरा देने से बात साफ हो जाएगी। आज तक अनूप मंडल के लोगों ने जैनों पर जो भी आरोप(प्रमाण सहित सत्य/असत्य) लगाए हैं तब आप नहीं पधारे क्या इसके पीछे भी कोई रहस्य है? क्या आपकी नजरों में वे लोग मूर्ख हैं जो को राम या मोहम्मद को गाली देने या कार्टून बना देने पर रोक लगाने के लिये न्यायालय से गुहार करते हैं? क्या आपकी निजी राय में इस तरह के धार्मिक विवादों में न्यायपालिका की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिये??जैनों को अल्पसंख्यक मान कर उनके हितों पर न्यायापालिका की क्या भूमिका होनी चाहिये या उन्हें राक्षस कह कर मानव समाज से बाहर खदेड़ देना चाहिये?????
ऐसे सैकड़ों सवाल हैं जिनका उत्तर देने के लिये शायद अब आप दोबारा इस मंच पर नहीं पधारेंगे जैसे अमित जैन चुप्पी साध गए हैं।

जय जय भड़ास

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प्रिय अजमल आमिर कसाब मुंबई नगरी तुम्हारे लिये किसी रखैल जैसी ही है

गुरुवार, 25 नवंबर 2010

आज दो साल हो गया जब तुमने अपने वीर धर्मयोद्धा साथियों के साथ हमारी नगरी मुंबई को बलात अपना बना लिया था। इस प्रकरण में माँ मुंबादेवी के लगभग पौने दो सौ बच्चों को तुम लोगों को मारना पड़ा लेकिन ये तुम्हारा प्रेम ही तो है जिसके लिये तुमने इतना सब कुछ कर डाला इस नगरी को बलपूर्वक अपनी रखैल बना लेने के लिये। हम जानते हैं कि तुम्हें इसकी प्रेरणा अपने बड़े भाई अफ़जल गुरु जी से मिली होगी जिन्होंने मुंबई नगरी की नानी माँ "संसद" को ही बलत्कृत कर डाला था और आज तक सुखी हैं ये बात अलग है कि संसद नानी से रोजाना ही साठ-पैंसठ सालों से यही सब होता आ रहा है लेकिन वो हम लोगों द्वारा चुने हुए अधिकृत बलात्कारी होते हैं जो संसद की गरिमा को नोचा खसोटा करते हैं।
कुछ लोग आज दिल्ली-मुंबई जैसी जगहों पर आज आपके उस वीरता पूर्ण कृत्य को याद करने के लिये मोमबत्तियों का धंधा करेंगे जिनसे खरीद कर कुछ लोग उन्हें जलाएंगे। मोमबत्ती जलाने वालों को लगता है कि वे ऐसा करके उन्हें श्रद्धांजलि दे रहें हैं जिन्हें आपने वीरतापूर्वक कीड़े-मकोड़ों की तरह मार दिया था। मोमबत्तियाँ बुझ जाएंगी सब अपने अपने घर चले जाएंगे। आप उसी तरह हमारे देश के कानून का कंडोम पहन कर संवैधानिक अधिकारपूर्वक अपनी रखैल मुंबई नगरी से जितना चाहें जैसे चाहें सब कुछ कर सकते हैं, जेल अधिकारियों को भी पीट दिया करिये यदि वे कुछ अड़चन पैदा करें।
हमारे देश में आप जैसे महावीर दामादों की सख्त कमी है आशा है कि आपके आका इस बात पर ध्यान देते हुए जल्द ही कुछ और लोगों को भेजेंगे। हमारी मुंबई नगरी अभी भी सुरक्षा के नाम पर अभी भी वैसी ही अधनंगी चौराहे पर खड़ी है जैसे पिछले साल इस दिन थी क्योंकि उसकी गरिमा की नीलामी करने वाले तो हमारे देश के नेता,जनता और अधिकारी ही हैं।
आपको सादर नमन
जय जय भड़ास

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कसाब को शादी करनी है..... कोई मानव अधिकार संगठन इस पुण्य कर्म को आगे आए

सोमवार, 24 मई 2010

कुछ समय पहले तक हमारे अतिसक्रिय मीडिया में अजमल कसाब की फांसी की चर्चा चल रही थी। अब एक नया विषय निकल कर सामने आया है कि कसाब शादी करना चाहता है और उसे भारतीय लड़की भी चलेगी। भड़ास पर तो भड़ासियों ने पहले ही राष्ट्र दामाद कह दिया था क्योंकि भड़ासियों को इस बात का अनुमान था कि आखिर जिसके पास बंदूक है तो वो आखिर कितने दिन तक उसे न चलाएगा। उसने अपनी काम-संबंधी(सेक्सुअल जरूरतों न कि कार्य विषयक) बातों को । ये बातें कसाब के डॉक्टरों ने बतायी हैं लेकिन जेल के अधिकारी श्री धमने इस बात से इन्कार कर रहे हैं कि जिसके सिर पर मौत खड़ी हो वह ऐसी बातें कैसे कर सकता है वो तो आंख तक मिला कर बात नहीं करता ऐसी बातें कैसे करेगा। अब धमने इस बात को क्यों नहीं समझते कि कसाब भारत के कानून को समझ चुका है अब तो वह कैदियों के मानवीय अधिकारों की भी बातें करता है(ये सारी भंकस नवभारत टाइम्स,मुंबई में छापी गयी है)।
मेरा तो मानना है कि किताब-उल-चेहरा-अल-आलमीन(फ़ेसबुक के तालिबानी संस्करण) में अब एक कम्युनिटी बना लेनी चाहिये उन लड़कियों की जो कि कसाब से शादी करके अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि पाना चाहती हैं या उन लड़कियों की जो कि हिंदी फिल्मों की उस हीरोइन से प्रेरणा लेती हैं जो कि एक आतंकवादी से प्यार-प्यार खेल कर उसे अच्छा नागरिक बना देती हैं। उम्मीद है कि भारत सरकार कम से कम इस कारण से तो फ़ेसबुक पर प्रतिबंध न लगायेगी।
हमारे परम भड़ासी गुरूदेव डॉ। श्रीवास्तव जी ने फेसबुक पर एक समूह बनाया भी है आप चाहें तो इसमें जुड़ सकते हैं और शुरू करें दे धमाल.........
जय जय भड़ास

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दिवाकर मणि जी और नीलाभ वर्मा जी के नाम भड़ास पर विमर्श हेतु स्नेह भरा आमंत्रणपत्र

मंगलवार, 11 मई 2010

आत्मन दिवाकर मणि जी,आपने लिखा कि टिप्पणी प्रकाशन में कोई पक्षपात आपने देखा है,मैं इस सामुदायिक पत्रा का संचालक होने के नाते आपसे आग्रह करता हूँ कि कृपया बताएं कि आपने किस पोस्ट पर ये अनुभव करा है। असल में यहां पर टिप्पणी के मॉडरेशन के पीछे कारण है कि बेनामी डरपोक लोग जितनी गालियाँ माँ बहनों को देते हैं आप उसे कदाचित सहन न कर सकेंगे इसलिये उन्हें रोक दिया जाता है। नाम सहित करी टिप्पणियों को मैं और भाई रजनीश झा देखने के बाद प्रकाशित कर देते हैं लेकिन जो बात आप कह रहे हैं उसे अवश्य स्पष्ट करें क्योंकि लेखक भी आपकी करी टिप्पणी हटाने के लिये स्वतंत्र रहता है हो सकता है हमारी नज़र में आने से पहले ही आपकी टिप्पणी लेखक ने हटा दी हो और आपको लगा हो कि ये हमारी धूर्तता या पक्षपात है। रही बात हमारे पिछवाड़े पर लात पड़ने की तो मुंबई में जो हुआ उसे हमसे बेहतर कौन समझ सकता है हमने अपने साथी खोए हैं आप कदाचित गांधी के सिद्धान्तों के पीछे खड़ी हमारी न्यायपालिका और विधायिका के दोमुँहे व्यवहार पर करे गये व्यंग को एकदम सादे अर्थ में ले रहे हैं। यही वह मंच है जहाँ न्यायपालिका के व्यवहार में अनियमितताओं के विरोध में लिखने का साहस है वरना कितने ऐसे पत्रा हैं जहाँ लोग चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया बालाकृष्णन के विरोध में लिख पाते हैं जरा दो चार के नाम लिख दीजियेगा।
नीलाभ वर्मा जी तो पता नहीं किस दुनिया में रह रहे हैं जो कि ये कह रहे हैं कि शायद ही कोई ऐसा भारतीय होगा जो महात्मा गाँधी के सिद्धान्तों से परे है। साफ़ शब्दों के लिखिये कि महात्मा गाँधी का कौन सा सिद्धान्त फांसी का समर्थन करता है। ये विरोधाभास किस बात का है हमारी संवैधानिक व्यवस्था का या फिर गाँधी के आजकल के परिप्रेक्ष्य में समयबाह्य जैसे दिखने का संदर्भ???? मेरी जानकारी में आप सुधार करेंगे इस बात का निवेदन है। क्या महात्मा गाँधी सजा के पक्षधर थे या आप उनसे सहमत नहीं हैं?? आपके अनुसार जो सजा मिली है वह कम है तो आप भड़ास के खुले मंच पर लिखिये कि क्या सजा होती महात्मा गाँधी के सिद्धान्तों से सहमत "सभी" भारतीयों के अनुसार????
क्या कभी आतंकवाद के मूलभूत कारणों पर विमर्श करने का साहस है आपमें??? मैं भड़ास पर आपका स्वागत करता हूँ।
जय जय भड़ास

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कसाब को फांसी की सज़ा सुनाकर विशेष अदालत ने महात्मा गांधी के मुंह पर मारा जोरदार तमाचा



दुनिया जानती है कि भारत में मोहनदास करमचंद गांधी को राष्ट्रपिता स्वीकारा है ये स्वीकृति सामाजिक हो सकती है कानूनी नहीं। जैसे हिंदी के राष्ट्रभाषा होने की कोई कानूनी मान्यता नहीं है ठीक उसी तरह से मोहनदास करमचंद गांधी के राष्ट्रपिता होने के कोई कानूनी प्रमाण नहीं है। भारतीय मुद्रा के ऊपर इनकी तस्वीर का होना इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि भारतीय शासन-प्रशासन और जनता इस बात से सहमति रखते हुए महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता स्वीकारती है और इस बात का विरोध नहीं करती कि उनकी तस्वीर भारतीय नोट पर हो। इस सारी बात का एकदम साफ़ मतलब है कि हम भारतीय लोग महात्मा गांधी और उनके सिद्धान्तों से सहमति जताते हैं। एक बात और इन सारी बातों से निकल कर सामने आती है कि हमारी न्यायपालिका महात्मा गांधी के सिद्धान्तों से पूर्णतया असहमत है और उनके विचारों की अवहेलना करना ही कानून समझती है जो कि अंग्रेजी हुकूमत के दौरान होता रहा था लेकिन अब क्यों? आज तो भारत स्वतंत्र है हम अपने न्याय सिद्धान्तों को गांधी के विचारों के आधार पर रख सकते हैं। जस्टिस टहलियानी द्वारा तमाम सबूतों और गवाहों के बिनाह पर अजमल आमिर कसाब को फांसी की सज़ा सुना देना हमारे देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सिद्धान्तों के पूरी तरह से विरोध में है। जस्टिस टहलियानी ही क्या तमाम न्याय प्रणाली इस तरह की क्रूर सजाएं देकर हमेशा महात्मा गांधी के मुंह पर तमाचा मार कर हमे ये जता-बता रही हैं कि न तो गांधी महात्मा थे न राष्ट्रपिता और न ही उनके सिद्धान्त देश को चलाने के लिये स्वीकार्य हैं। ये एक विमर्श का विषय है कि गांधी स्वीकार्य हैं या नहीं या हम बस गांधी को सिर्फ़ उतना ही स्वीकारते हैं जितना हमें पसंद है, पूरी तरह नहीं तो फिर देश की मुद्रा पर उनकी तस्वीर का क्या औचित्य???????
जय जय भड़ास

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सचमुच डा.रूपेश श्रीवास्तव आतंकवादी ही तो हैं

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2009

अभी दो दिन पहले की बात है कि भाई राममिलन जी का फोन आता है ये बताने के लिये कि उनके कार्यालय में संपादक जी को किसी ने मुंबई से फोन करा था कि डा.रूपेश श्रीवास्तव और मुनव्वर सुल्ताना के संबंध आतंकवादियों से हैं। भाई राममिलन ने ये सब बताया और कहा कि वो शख्स बता रहा था कि जनवरी में आप लोगों पर मुकदमा चलने वाला है। राममिलन और संपादक अग्रवाल जी शुभचिंतक होने के नाते परेशान होना सहज स्वाभाविक है। अग्रवाल जी तो डा.रूपेश श्रीवास्तव को निजी तौर पर जानते नहीं है तो मैं अपने कोश से इनके कुछ फोटोग्राफ़्स आप लोगों के सामने ला रही हूं जिनसे सिद्ध हो जाएगा कि ये इंसान आज के दौर का कितना बड़ा आतंकवादी है
भाई हरभूषण सिंह अंधेरी(मुंबई का एक उपनगर) में अपने घर में अकेले बुखार से तप रहे थे तो ये हज़रत जाकर उन्हें अपने घर उठा लाते हैं और एक सप्ताह उनकी सेवा करते हैं, ये आतंकवाद नहीं तो क्या है?
पूर्व जीवन में अपराधी रहे "एक्स मैन" के नाम से जाने वाले सज्जन जब गम्भीर जख्मी हुए तो जनाब जुट गये खिदमत में और टूटी पसलियों से लेकर घुटने तक को मात्र ढाई माह में सही कर दिया। ये है आतंकवाद।
घुटनों से लेकर पैर के पंजे तक का परीक्षण करते हुए डा.रूपेश श्रीवास्तव
पसलियों के दर्द और कंधे के डिसलोकेशन को समझते एहसास करते हुए डा.रूपेश श्रीवास्तव
दूसरे के दर्द को अपना मान लेना तो बस ये ही कर सकते हैं आतंकवादी डा.रूपेश श्रीवास्तव
जल्द ही पट्टी और प्लास्टर हटा दूंगा ये आश्वासन देते हमारे आतंकवादी गुरू डा.रूपेश श्रीवास्तव
ये रही इंसान की बात..... अब देखिये इस आतंकवादी का पशु-पक्षियो के प्रति प्रेम का नमूना। चित्र में डा.रूपेश श्रीवास्तव एक जख्मी उल्लू के बच्चे को ड्रापर से लिक्विड फूड दे रहे हैं
बासित मेरा छोटा भाई और मेरी माताजी मुनव्वर आपा के नाम से प्रसिद्ध इस चित्र में आपको दिख रहे हैं। बादशाह बासित डर रहे थे उस पक्षी को छूने में तो डा.रूपेश श्रीवास्तव ने उस डर को दूर कराअब हमारा "व्हिसिल" नाम का प्यारा उल्लू का बच्चा बादशाह बासित के हाथ में है जो कि उसके उपचार में डा.रूपेश श्रीवास्तव की सहायता कर रहे हैं।
डा.रूपेश श्रीवास्तव के प्रेम और बादशाह बासित के मदद करने के जज़्बे को आप सब इस चित्र में देख सकते हैं
इस पूरे काम में पूर्ण मनोयोग से जुटे डा.रूपेश श्रीवास्तव और बादशाह बासित के साथ में हैं मुनव्वर आपा (मेरी माताजी)जो कि इस आतंकवादी की अजीब शख्सियत को प्रशंसा भरी निगाहों से निहार रही हैं।
लीजिये टूटे हुए डैने और पैर पर पट्टी-प्लास्टर हो गया।
आप देख रहे हैं चित्रों की जुबानी मैंने इस व्यक्ति के बारे में आपको जो बताना चाहा। बारिश में नाले में गिरे कुत्ते के बच्चे से लेकर कौव्वे द्वारा जख्मी करे कछुए के बच्चे को जो आदमी घर ले आता है उसके बारे में शब्दों में कैसे लिखा जाए।
ये शख्स आतंकवादी है और इसका आतंक है उन लोगों में जो मजलूमों को सताते हैं, जो गलत धंधे करते हैं उनके लिये ये शख्स आतंक है। इसकी सच्चाई और ईमानदारी का आतंक है आसपास के बुरे लोगों में। कई बार मैंने खुद देखा है कि किसी बेगाने के हक़ की लड़ाई में जिस कदर ये इन्वाल्व हो जाते हैं वह तो एक "आतंकवादी" और एक्स्ट्रीमिस्ट ही कर सकता है। हिंदी ब्लाग जगत के लोग भी अब कुछ कुछ इनके स्वभाव से परिचित हो चले हैं।
सचमुच आज की दुनिया में ऐसे लोगों की जरूरत नहीं है। इन पर बिना कोई मुकदमा चलाए सरेआम फांसी दे देनी चाहिये क्योंकि ये तो अजमल कसाब से भी ज्यादा खतरनाक हैं।
जय जय भड़ास

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कसाब...कसाब...कसाब और भड़ास का मंच

रविवार, 26 जुलाई 2009

जरा ध्यान दीजिये इन सारी बातों पर.......
मुंबई पर आतंकी हमले के आरोपी अजमल कसाब को आर्थर रोड जेल में स्थानांतरित किए जाने के बाद महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ मंत्री ने उससे जेल में मुलाकात की थी। यह जानकारी गृह विभाग से जुड़े भरोसेमंद सूत्रों ने दी है। इनके मुताबिक, इस मंत्री ने पुलिस महकमे के आला अफसरों को इस बारे में सूचित किया था। कसाब से मुलाकात के दौरान मंत्री ने अपनी पहचान भी उससे छिपाई थी।सूत्रों के अनुसार, जेल में सुरक्षा इंतजामों का जायजा लेने आए इस मंत्री ने कसाब को बताया था कि उसका देश पाकिस्तान उसे अपना नागरिक मानने को तैयार नहीं है। यह सुनने के बाद कसाब के चेहरे पर चौंकाने वाले भाव थे। मुंबई आतंकी हमलों के मुख्य आरोपी आमिर अजमल कसाब ने बुधवार को स्पेशल कोर्ट में कहा कि मुझे दुनिया वाले ही सजा दें। कसाब का कहना था कि उसका बयान किसी दबाव में नहीं दिया गया है। उन्होंने गुनाह किसी के दबाव में नहीं कबूला है।उसने कहा कि मेरे गुनाह की सजा खुदा भी माफ नहीं कर सकता और मेरी सजा यही है कि मुझे फांसी दे दी जाए। इसके पहले कसाब ने कोर्ट में कहा था कि उसे अपना गुनाह कबूल है और उसे जल्द से जल्द सुनवाई कर सजा दे दी जाए। मुंबई पर पिछले साल 26 नवंबर को हुए आतंकी हमले के आरोपी अजमल कसाब ने हमले संबंधी क्लोज सर्किट टीवी फुटेज वाली सीडी की मांग की, जिसे विशेष अदालत ने ठुकरा दिया। वकील अब्बास काजमी के मुताबिक, ‘कसाब के दिमाग में विचित्र विचार आते रहते हैं। मुझे पूरा भरोसा नहीं है कि वह सीडी शब्द का मतलब भी जानता होगा।’ पिछले हफ्ते कसाब ने विशेष कोर्ट से कहा था कि वह एक पत्र मक्का भेजना चाहता है। अभियोजन पक्ष ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान छह गवाहों से पूछताछ की थी। इसके बाद अभियोजन ने कसाब तथा उसके साथी अबू इस्माइल द्वारा सीएसटी के समीप हमले के सीसीटीवी फुटेज दिखाने का आग्रह किया था। काजमी ने इस आग्रह पर आपत्ति जताई। जब कसाब ने फुटेज की सीडी मांगी तो विशेष जज एमएल टाहिलियानी ने उससे पूछा कि वह क्यों यह सीडी चाहता है।तब कसाब ने कोई जवाब नहीं दिया। जज ने कसाब से यह भी पूछा कि क्या उसके पास जेल में सीडी प्लेयर है तो उसने नकारात्मक उत्तर दिया। इस पर जज ने कहा कि कसाब को सीडी देने से कोई मतलब नहीं निकलेगा, क्योंकि उसके पास उसे देखने का कोई साधन नहीं है।
आप इन सारी बातों का क्या मतलब समझ पा रहे हैं? इस पूरी अदालती प्रक्रिया का क्या अर्थ निकल रहा है? कौन किसे बेवकूफ़ बनाने की कोशिश कर रहा है? जनता तो रेडीमेड है आप सबका अब्बास काज़मी और अजमल कसाब के बारे में क्या ख्याल है और ये मंत्री कौन है जो कि जीजाजी से मिलने गया था कहीं ये राष्ट्र ससुर तो नहीं बनना चाहता?????? हजारों सवाल और बस एक भड़ास का मंच...........
जय जय भड़ास

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प्रिय पाकिस्तान! अगली बार आतंकी भेजो तो जरा उम्र का ध्यान रखना कि सतरह का ही हो...

शनिवार, 25 अप्रैल 2009

आज की राष्ट्रदामाद श्री अजमल कसाब जी और सरकारी वकील श्री उज्ज्वल निकम जी के पक्ष पर खूब सोच समझ कर एक विचार दिमाग में आ रहा है जो कि मैं हमारे आदरणीय पड़ोसी राष्ट्रों पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि को एक मुफ़्त सलाह के रूप में दे रहा हूं। इस विषय पर बहुत संभव है कि ये हमारी सरकार की देश की बेलगाम बढ़ती आबादी पर लगाम लगाने के लिये कंडोम के इस्तेमाल की सलाह के जैसी ही कोई योजना हो कि यदि आप हमारे देश में जनसंख्या नियंत्रण के लिये अपने मुल्क से आतंकवादी भेज कर सहायता करना चाहें तो इस बात का ध्यान रखिये कि उम्र अट्ठारह साल से कम ही हो ताकि हम उन्हें राष्ट्रदामाद बना कर उनकी खातिरदारी करें और मात्र तीन साल बाद ससम्मान वापस आपके देश भेज दिया जाए ताकि वे हवाई जहाज हाईजैकिंग आदि जैसे थोड़े बड़े कामों में सहयोग कर सकें जिसके बदले में हमारे प्रधानमंत्री या अन्य जिम्मेदार सत्ताधारी आपके आतंकियों को सप्रेम आपको देने जा सकें। मेहरबानी करके इस बात का अवश्य ध्यान रखें एक बार फिर से कि अगली खेप में जो आतंकवादी भेजें उनकी उम्र सतरह साल के आस पास ही हो। इस तरह हमारी जनसंख्या का नियंत्रण भी आसानी से होता रहेगा।
जय जय भड़ास

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कसाब बच्चा है उसे मात्र तीन साल की सजा होगी....

आज मैं फिर घूम फिर कर राष्ट्रदामाद श्री अजमल कसाब जी के बारे में बकबकाऊंगा। चूंकि श्री कसाब जी ने कहा है कि वे अभी नाबालिग हैं यानि कि उन्होंने जो कुछ भी करा वह महज उनका बचपना था इसलिये हे भारत के न्यायकर्ताओं मेरे जैसे मासूम बच्चे के साथ आप सब जरा अक्ल से काम लें वरना यदि आपने मुझे कड़ी सजा दी तो मेरे सुधरने की गुंजाइश जो कि आपके कानून के अनुसार है वह खत्म हो जाएगी। आप सब अपने कानून की इज़्ज़त करते हुए मेरे बचपने के बारे में सोचिये। मेरे लिये कल से दुध्धू की बाटली जेल में भेजवाया करो और साथ मे एक दो एक्स्ट्रा निप्पल भी ताकि अगर मै अपने दूध के दांत से निप्पल चबा डालूं तो बोतल से दूध लीक न होने लगे। श्री उज्ज्वल निकम जो कि सरकारी वकील हैं उन्होंने बताया है कि यदि कसाब बच्चा है तो उसे मात्र तीन साल की सजा होगी। ऐसा सिर्फ़ हमारे देश के संविधान में ही संभव है।
जय जय भड़ास

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श्री अजमल कसाब जी "राष्ट्र-दामाद"

रविवार, 8 मार्च 2009

भड़ासियों आजकल देश में एक के बाद एक खुशखबरी मिल रही हैं मैंने कल ही कि सूचना संचार के एक श्रेष्ठ माने जाने वाले माध्यम अपने हज्जाम संजय से सुना कि मुंबई पर आतंकवादी हमला करने के झूठे आरोप में गिरफ़्तार एकमात्र जीवित व्यक्ति को भारत सरकार कुछ दिनों तक खातिरदारी करने के बाद पड़ोसी मुल्कों से बेहतर संबंधों की गुंजाइश बनाए रखने की विदेश नीति के तहत श्री अजमल कसाब जी को "राष्ट्र-दामाद" की उपाधि से सम्मानित करके तमाम उपहार आदि दे कर वापिस उनके वतन भेजने वाली है। मुझे नहीं पता चल सका कि मेरे हज्जाम संजय की सूचना के स्रोत क्या होते हैं पर उसकी सूचनाएं आजकल के खबरिया चैनलों से कहीं ज्यादा दिलचस्प होती है। संजय की खबर है कि श्री अजमल कसाब जी को भारत सरकार के कई विभागों ने प्रयास करके बुलवाया था और उनका आगमन भी साधारण न हो कर बहुद्देश्शीय है जिसमें कि रक्षा मंत्रालय ने उन्हें समुद्री सीमा की चौकसी की आजमाइश के लिये बुलाया था साथ ही मुंबई पुलिस के लिये भी एक ड्रिल हो गयी, दूसरा उद्देश्य मुंबई में मुंह उठा कर चले आने वाले परग्रहीय(क्षमा करें परप्रांतीय) लोगों को रोकना; तीसरा उद्देश्य सम्पूर्ण राष्ट्र में जनता द्वारा चुनी गयी सरकार द्वारा अतिथि देवि भव की भावना के उत्कट प्रदर्शन का हेतु अन्यथा बार-बार ऐसे मौके कहां मिलते हैं? श्री अजमल कसाब जी को पेट दुखा तो पूरा स्वास्थ्य मंत्रालय एण्डोस्कोपी करने दौड़ पड़ा, कहीं जवांई राजा को हवा न लग जाए इसलिये उनके आवागमन के लिये दो करोड़ रुपए की लागत से बम-प्रूफ़ सुरंग नुमा रास्ते का निर्माण कराया जा रहा है। यही सरकार अपने देशवासियों के लिये सड़क के गड्ढें साठ सालों में न भर पायी, बीमारियों से जूझते आम आवाम को स्वास्थ्य न उपलब्ध करा पायी लेकिन श्री अजमल कसाब के लिये तन-मन-धन से हाजिर है कि कहीं दामाद जी की सेवा में कोई कसर न रह जाए वरना समधी जी नाराज होकर पूंछ क्षेत्र में हमारे जवानों की खामखां ही बलि ले लेंगे जैसा कि वे अक्सर करते रहते हैं।
जय जय भड़ास

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