राक्षसों ने ब्लागरों को लपेटा अपने मायाजाल में, मुंबई ब्लागर मीट

बुधवार, 9 दिसंबर 2009

अनेक लोग सहमत रहे हमारी बातों से और अनेक बार हमने इस बात के सबूत भी दिये कि जैन राक्षस किस तरह से लोगों को मीठा बोल कर और घुलमिल कर अपने जाल में फंसाए रहते हैं ताकि कोई इनकी हकीकत न जान पाए। इसका ताजा उदाहरण रहा मुंबई में हाल ही में हुई ब्लागर मीट जिसे कि सारी मुंबई छोड़ कर एक जैन मंदिर में करा लिया गया। ये है महावीर सेमलानी के भोलेपन का जादू। अब भला कोई हमारी बात पर क्यों यकीन करेगा आसानी से कि ये शख्स कितना कुटिल है।
एक बात ये राक्षस भी समझ गये होंगे कि हमारे अवतार स्वरूप डा.रूपेश श्रीवास्तव पर कोई जादू नहीं चलता है । ये बात तुम लोगों के लिये एक चेतावनी भी है कि अब तुम डा.रूपेश श्रीवास्तव जी के तेज से स्वयं ही नष्ट हो जाओगे।
जय नकलंक देव
जय जय भड़ास

7 टिप्पणियाँ:

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

अवश्‍य ही सुमन जी मांसाहारी होंगे
तभी उन्‍हें मीट पसंद आया और
उन्‍होंने नाइस कहा
अब यह तो नहीं पता
वाई च्‍वाइस कहा
वैसे तो यह उनकी आदत है
इस पर चर्चा खूब हुई
उस पर लिखेंगे हम जल्‍दी ही।

मुनेन्द्र सोनी ने कहा…

अविनाश भाई,सुमन जी का नाइस लिखना बहुत गहरी प्रेरणा देता है तब जबकि उन्हें पेसमेकर लगा है। हर सुबह सैकड़ों ब्लाग्स देख कर अपनी उपस्थिति का "राम-राम" जरूर कर जाते हैं,पहले मुझे चिढ़ होती थी लेकिन अब भाई के प्रति आदर उत्पन्न हो गया है। जो लोग भी इस बात पर इनका मजाक बनाते हैं वे इनके बारे में जानते न होंगे।
दूसरी बात कि क्या अनूप मंडल की पोस्ट को अविनाश भी ने देखा कि ये विषय क्या और क्यों है कभी इस पर लिखने का साहस जुटाइये यदि हो सके तो.....
जय जय भड़ास

संजय बेंगाणी ने कहा…

भड़ास पर कोई भी अपनी भड़ास निकाल सकता है, इस नाते मंच का अपना महत्त्व है.

किसी व्यक्ति, या संस्था या बाबा के बारे में भड़ास निकाले यह समझ में आता है मगर पूरे समूदाय के लिए अपशब्दों के प्रयोग की छूट भड़ास पर मिलना आश्चर्य जगाता है.

कल को मैं मुस्लिम या ईसाई या फिर किसी भी धर्मआवलम्बियों को राक्षस या ऐसा ही कुछ लिखना चाहुगाँ तो क्या मुझे छूट होगी? इसी कड़ी में आगे जाते हुए महिलाओं व जिन्हे दलित कहा जाता है ऐसे लोगों के प्रति भी अपशब्द लिखुं और हमारे ही ग्रंथों का संदर्भ दूँ तो क्या मुझे छूट होगी?

RAJNISH PARIHAR ने कहा…

कम से कम ब्लोगर मिलन में तो राजनीती न फैलाए..

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

संजय जी आपका स्वागत है अपशब्दों और गालियों का मानव जीवन में बड़ा गहरा स्थान है लेकिन वे किस मंतव्य और प्रयोजन से प्रयोग करी जा रही हैं वह महत्त्वपूर्ण है कि स्थान दिया जाए अथवा नहीं। आप जो भी लिखना चाहते हैं अवश्य ल्खिये मैं वचन देता हूं कि भड़ास के दर्शन के प्रति कोई अन्याय न होगा
जय जय भड़ास

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

@ रजनीश परिहार


फैलाने दो राजनीति को

ऐसे फैलेगी तो एक दिन

समाज से गंदगी बह जाएगी

राजनीति जो एक तेजाब है
इसके बहाने

धुलाई पुंछाई तो हो जाएगी।

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