सचमुच डा.रूपेश श्रीवास्तव आतंकवादी ही तो हैं

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2009

अभी दो दिन पहले की बात है कि भाई राममिलन जी का फोन आता है ये बताने के लिये कि उनके कार्यालय में संपादक जी को किसी ने मुंबई से फोन करा था कि डा.रूपेश श्रीवास्तव और मुनव्वर सुल्ताना के संबंध आतंकवादियों से हैं। भाई राममिलन ने ये सब बताया और कहा कि वो शख्स बता रहा था कि जनवरी में आप लोगों पर मुकदमा चलने वाला है। राममिलन और संपादक अग्रवाल जी शुभचिंतक होने के नाते परेशान होना सहज स्वाभाविक है। अग्रवाल जी तो डा.रूपेश श्रीवास्तव को निजी तौर पर जानते नहीं है तो मैं अपने कोश से इनके कुछ फोटोग्राफ़्स आप लोगों के सामने ला रही हूं जिनसे सिद्ध हो जाएगा कि ये इंसान आज के दौर का कितना बड़ा आतंकवादी है
भाई हरभूषण सिंह अंधेरी(मुंबई का एक उपनगर) में अपने घर में अकेले बुखार से तप रहे थे तो ये हज़रत जाकर उन्हें अपने घर उठा लाते हैं और एक सप्ताह उनकी सेवा करते हैं, ये आतंकवाद नहीं तो क्या है?
पूर्व जीवन में अपराधी रहे "एक्स मैन" के नाम से जाने वाले सज्जन जब गम्भीर जख्मी हुए तो जनाब जुट गये खिदमत में और टूटी पसलियों से लेकर घुटने तक को मात्र ढाई माह में सही कर दिया। ये है आतंकवाद।
घुटनों से लेकर पैर के पंजे तक का परीक्षण करते हुए डा.रूपेश श्रीवास्तव
पसलियों के दर्द और कंधे के डिसलोकेशन को समझते एहसास करते हुए डा.रूपेश श्रीवास्तव
दूसरे के दर्द को अपना मान लेना तो बस ये ही कर सकते हैं आतंकवादी डा.रूपेश श्रीवास्तव
जल्द ही पट्टी और प्लास्टर हटा दूंगा ये आश्वासन देते हमारे आतंकवादी गुरू डा.रूपेश श्रीवास्तव
ये रही इंसान की बात..... अब देखिये इस आतंकवादी का पशु-पक्षियो के प्रति प्रेम का नमूना। चित्र में डा.रूपेश श्रीवास्तव एक जख्मी उल्लू के बच्चे को ड्रापर से लिक्विड फूड दे रहे हैं
बासित मेरा छोटा भाई और मेरी माताजी मुनव्वर आपा के नाम से प्रसिद्ध इस चित्र में आपको दिख रहे हैं। बादशाह बासित डर रहे थे उस पक्षी को छूने में तो डा.रूपेश श्रीवास्तव ने उस डर को दूर कराअब हमारा "व्हिसिल" नाम का प्यारा उल्लू का बच्चा बादशाह बासित के हाथ में है जो कि उसके उपचार में डा.रूपेश श्रीवास्तव की सहायता कर रहे हैं।
डा.रूपेश श्रीवास्तव के प्रेम और बादशाह बासित के मदद करने के जज़्बे को आप सब इस चित्र में देख सकते हैं
इस पूरे काम में पूर्ण मनोयोग से जुटे डा.रूपेश श्रीवास्तव और बादशाह बासित के साथ में हैं मुनव्वर आपा (मेरी माताजी)जो कि इस आतंकवादी की अजीब शख्सियत को प्रशंसा भरी निगाहों से निहार रही हैं।
लीजिये टूटे हुए डैने और पैर पर पट्टी-प्लास्टर हो गया।
आप देख रहे हैं चित्रों की जुबानी मैंने इस व्यक्ति के बारे में आपको जो बताना चाहा। बारिश में नाले में गिरे कुत्ते के बच्चे से लेकर कौव्वे द्वारा जख्मी करे कछुए के बच्चे को जो आदमी घर ले आता है उसके बारे में शब्दों में कैसे लिखा जाए।
ये शख्स आतंकवादी है और इसका आतंक है उन लोगों में जो मजलूमों को सताते हैं, जो गलत धंधे करते हैं उनके लिये ये शख्स आतंक है। इसकी सच्चाई और ईमानदारी का आतंक है आसपास के बुरे लोगों में। कई बार मैंने खुद देखा है कि किसी बेगाने के हक़ की लड़ाई में जिस कदर ये इन्वाल्व हो जाते हैं वह तो एक "आतंकवादी" और एक्स्ट्रीमिस्ट ही कर सकता है। हिंदी ब्लाग जगत के लोग भी अब कुछ कुछ इनके स्वभाव से परिचित हो चले हैं।
सचमुच आज की दुनिया में ऐसे लोगों की जरूरत नहीं है। इन पर बिना कोई मुकदमा चलाए सरेआम फांसी दे देनी चाहिये क्योंकि ये तो अजमल कसाब से भी ज्यादा खतरनाक हैं।
जय जय भड़ास

8 टिप्पणियाँ:

Suman ने कहा…

ये शख्स आतंकवादी है .yes.nice

बेनामी ने कहा…

झूठी धमकियों वाली फोन काल्स से घबरा जाते हो. डरपोक हो क्या?

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

ये गलत बात है आपने निजी तस्वीरें सार्वजनिक कर दी हैं लेकिन आपका मंतव्य सही है। क्या आपको लगता है कि कोई चिरकुट फोन कर देगा और भड़ासी उससे डर जाते हैं? अगर आपको ऐसा नहीं लगता तो फिर इस पोस्ट का क्या औचित्य है? मेरे बारे में आपने निजी राय दी है उसे सब पर मत थोपिये। व्हिसिल के कारण माताजी ने खूब कोसा था कि उल्लू घर ले आया है अब जाकर सौ पचास सुअर भी ले आ ताकि रही सही कसर पूरी हो जाए :)
मैं अपना फोन नंबर भी लिखे देता हूं ताकि यदि किसी को कुछ धमकी वगैरह देने का मूड हो तो वो भी इरादा पूरा कर ले। मेरा आतंक तो है ये मैं स्वीकारता हूं कि बहुत सारे लोग मुझे देख कर रास्ता बदल कर भाग लेते हैं। भड़ास की ताकत का अंदाज जिन्हें नहीं है वे ही इस तरह का सियारपन करते हैं
जय जय भड़ास

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

09224496555
इस नंबर पर आप मुझे धमका सकते हैं, दुलरा सकते हैं, गरिया सकते हैं, प्रेमालाप कर सकते हैं,पगला सकते हैं, बौरा सकते हैं, दुखड़ा रो सकते हैं, सुख बांट सकते हैं.....

मनोज द्विवेदी ने कहा…

FARHIN JI SUKRIYA...YE JARURI HAI KI KUCHH LOGO KI BHRANTIYAN DUR HO. AAPNE BAHUT SAHI KAM KIYA HAI. ISASE BAHUT LOGO KA CONFUSION DUR HUA HOGA..

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

अनाम गुमनाम जी,
गलत टिपिया गए आप, फ़ोन कॉल क्या कोई सीधा टॉप के सामने खड़ा कर दे तो भी डाक्टर रुपेश ना घबराएं और रुपेश जी की बात तो अलग है यहाँ तो कोई भडासी ना घबडाये चाहे तो आजमा लो:-प
हाँ ऎसी हद्कत से यशवत की जरूर फटती थी और फट्टू दारू पीकर रोया करता था :-)
जय जय भड़ास

मुनव्वर सुल्ताना ने कहा…

भाई रजनीश जिसमें इतना तक साहस नहीं कि अपना नाम तक जाहिर कर दे वह भड़ासियों के साहस की ताब कैसे ला सकता है। मैं इस आतंकवादी के आतंक के रास्ते की मुरीद हूं। मैं अगली बार यदि पुनर्जन्म होता हो तो बेटे के रूप में अपने पेट से पैदा करना चाहती हूं। वो मां धन्य है जिन्होंने ऐसे ऊर्जावान पुत्र को जन्म दिया है
जय जय भड़ास

गुफरान सिद्दीकी ने कहा…

क्या बात है मै बहार क्या गया यहाँ इतना सब हो गया रुपेश भाई फ़ोन कॉल से डर गए अरे भाई ये लिखने वाले अपनी असलियत क्यूँ छुपा रहे हो भाई कहीं तुम ही तो नहीं थे और फ़ोन पर तुम्हारी ही तो पुंगी नहीं बज गयी ...................खैर रुपेश भाई फरहीन ने जो किया गलत नहीं है आप ही तो बोलते हैं की खांसो भी तो ऐसे सामने वाला हिल जाये...........!

आपका हमवतन भाई गुफरान सिद्दीकी (अवध पीपुल्स फोरम फैजाबाद अयोध्या)

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