यमराज ने भड़ास पर सिद्ध कर दिया कि मुस्लिम,ईसाई,जैन,बौद्ध आदि धर्म झूठ के पुलिंदे हैं हिंदू धर्म ही सच्चा है

शनिवार, 11 दिसंबर 2010

मृत्यु के अधिष्ठाता देवता यमराज कुछ दिनों से भड़ास पर पधार रहे हैं ये देख कर अच्छा लगा कि कम से कम यमराज ने अपने होने की बात से एक सच की किरण हम मूढ़ भड़ासियों की तरफ चमका दी कि दीदे फाड़ कर देखो जैसे मैं मृत्यु का देवता हूं हिंदू धर्म शास्त्र में वर्णित कथाओं में वर्णित अन्य देवता भी हैं जिनका अस्तित्त्व मात्र मेरे होने से ही सिद्ध हो रहा है। यमराज जी आप की बहन यमुना जी में भी प्रदूषण बढ़ रहा है क्या आप इसके प्रति चिंतित नहीं है या सिर्फ़ डॉ.रूपेश श्रीवास्तव के कूड़ा भरे दिमाग का कचरा साफ़ करने के लिये आपको हिंदी में ब्लॉगिंग शुरू करनी पड़ी। मैं डॉ.रूपेश श्रीवास्तव और अनूप मंडल के लोगों का हृदय से आभारी हूं कि उन्होंने ऐसी परिस्थिति उपजा दी कि आखिरकार देवी देवताओं(हिंदू धर्म में अवतारवाद और देवी-देवताओं को मानने वाला फिर्क़ा ही सही सिद्ध हुआ, ईश्वर को निराकार प्रकाश स्वरूप मानने वाले हिंदू भी मूरख सिद्ध हुए बाकी मुस्लिम, जैन, क्रिश्चियन आदि तो बहुत दूर से ही परम मूरख सिद्ध कर दिये यमराज जी ने हिंदी में ब्लॉगिंग करके) को इस मामले में उतर कर आना पड़ा।
वैसे एक बात और कहनी है यमराज जी कि अगली पोस्ट लिखियेगा तो जरा अपने सहकर्मी चित्रगुप्त जी से भड़ासियों के पाप-पुण्य का हिसाब-किताब पूछ कर बता दीजियेगा ताकि हम अभी से दिमागी तौर पर तैयार हो सके कि हमें कितने लाख साल तक नर्क में बिताना पड़ेगा आपको दुखी करने के बदले में क्योंकि अब तो भड़ास पर आपको आना पड़ेगा हम तो आपकी नई शुरू करी दुकान पर जाने से रहे आप तो जानते है कि जब आप आकर प्राण निकाल कर घसीटते हुए ले जाते हैं तब भी हमारे जैसे ढीठ भड़ासी हाथ छुड़ा कर भाग आते होंगे और आपको उनके पीछे भैंसा लेकर वापिस आना पड़ता होगा।
आप हिंदी लिखने में वर्तनी की गलतियाँ(स्पेलिंग मिस्टेक) थोक भाव में करते हैं क्योंकि आप देवता लोग तो संस्कृत में ब्लॉगिंग करते होंगे।
जय जय भड़ास

8 टिप्पणियाँ:

बेनामी ने कहा…

ये यमराज कोन है ,कहा से आया , क्या बात कर रहा है

बेनामी ने कहा…

तुम और तुम्हारा अनूप मंडल दोनों ही पागल हो , एक पागल ने कही और दूसरे ने मानी , महज ५० - १०० साल पहले एक पागल अपने आप को भगवन सिद्ध करता है और अपना नाम निक्लंक रख लेता है और कुछ दुसरे पागल उस के पीछे चल पड़ते है ,अब कही किसी ने उनकी निर्थक बात नहीं सुनी तो ,किसी ना किसी को पकड़ लिया और लगे अनाप शनाप बोलने की कोई तो पलट कर बोलेगा तो फिर शास्त्र को तोड़ मरोड़ कर बोलेगे
, और मुनवर सुल्ताना जी आप तो मुस्लिम है ,आप के कुरान में कहा लिखा है की जीव हत्या करने से वो आदमी जन्नत में जायेगा ,लेकिन फिर भी जितना मासाहार आप लोग करते है वो आप का खुदा ही जाने ,आप जिस तरह किसी मुर्गी को हलाल कर के पका कर खाते है ,यदि वैसे ही आप के बच्चो को हलाल कर पका कर कोई मुर्गी दाने की तरह चुग ले तो आप को शायद पता चल जाये की ........ कुतर्क इस तरह बनते है

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

बेनामी जी ! आप किसी ऐसी चीज़ का नाम बताएं जो जीव रहित हो और उसे खाकर आप ज़िंदा रह सकते हों !

बहुत , असंख्य जीव हमारी आंत , दांत और ख़ून में , खाल में और बाल में हमारे ख़ून और मांस पर पलते हैँ । इसे आप तो जानते नहीं होंगे लेकिन मेरे लिए अपने दिल में नर्म जगह रखने वाले डा. रूपेश जी ज़रूर जानते हैं ।

@ रूपेश जी ! आपकी माता जी के लिए वास्तव में शोकाकुल हूं । मैंने भड़ास पर 2 टिप्पणियां दीं थीं लेकिन उन्हें प्रकाशित नहीं किया गया ।

उन्हेँ श्रद्धांजलि देने के लिए एक पूरा ब्लाग ही मां को अर्पित रचनाओं के लिए बनाने का विचार है ।

आए दिन किसी न किसी को अपनी मां को खोने का दुख झेलना पड़ता है । सबके दिल की तसल्ली का सामान एक जगह सबको मिल जाएगा और अगर कोई उसमें शामिल होना चाहेगा तो उसका स्वागत है ।

सबसे पहले एक मां का , आपा मुनव्वर का और फिर भाई डा. रूपेश श्रीवास्तव जी का .

दिल है , ख़ुश्बू है , रौशनी है मां
अपने बच्चों की ज़िंदगी है मां

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

बेनामी जी ! आप किसी ऐसी चीज़ का नाम बताएं जो जीव रहित हो और उसे खाकर आप ज़िंदा रह सकते हों !

बहुत , असंख्य जीव हमारी आंत , दांत और ख़ून में , खाल में और बाल में हमारे ख़ून और मांस पर पलते हैँ । इसे आप तो जानते नहीं होंगे लेकिन मेरे लिए अपने दिल में नर्म जगह रखने वाले डा. रूपेश जी ज़रूर जानते हैं ।

@ रूपेश जी ! आपकी माता जी के लिए वास्तव में शोकाकुल हूं । मैंने भड़ास पर 2 टिप्पणियां दीं थीं लेकिन उन्हें प्रकाशित नहीं किया गया ।

उन्हेँ श्रद्धांजलि देने के लिए एक पूरा ब्लाग ही मां को अर्पित रचनाओं के लिए बनाने का विचार है ।

आए दिन किसी न किसी को अपनी मां को खोने का दुख झेलना पड़ता है । सबके दिल की तसल्ली का सामान एक जगह सबको मिल जाएगा और अगर कोई उसमें शामिल होना चाहेगा तो उसका स्वागत है ।

सबसे पहले एक मां का , आपा मुनव्वर का और फिर भाई डा. रूपेश श्रीवास्तव जी का .

दिल है , ख़ुश्बू है , रौशनी है मां
अपने बच्चों की ज़िंदगी है मां

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

सब जानते हैं कि भड़ास पर बेनामी कमेंट प्रकाशित नहीं होते हैं लेकिन यदि भड़ास की सदस्यता लिये हुए कोई बंदा वैचारिक मतभेद के चलते ऐसा कमेंट लिख देता है तो वह स्वतः प्रकाशित हो जाता है।
मुनव्वर आपा को आपने मुसलमान किस आधार पर लिखा?आपने कब देख लिया कि वे मांसाहार करती हैं??आप से ये किसने कह दिया कि क़ुरान शरीफ़ सिर्फ़ किसी व्यक्ति विशेष के लिये ही है, आपके कुरान का क्या अर्थ है महोदय????जितनी भगवदगीता मनुष्यों के लिये है उतनी ही कुरान भी मनुष्यता के लिये है, आप क्या मनुष्य से कुछ अलग हैं यदि आप यमराज हैं तो ये दोनो गृन्थ क्षमा सहित आपके लिये नहीं हैं।
भाई डा.अनवर जमाल जी आपसे निवेदन है कि बताएं किस संदर्भ की टिप्पणी प्रकाशित नहीं हुई हैं क्योंकि भड़ास के दो माडरेटर हैं। आप मेरे दुःख में भागीदार हैं इसके लिये आप सबका हृदय से आभार। मैं जीवन को समझता हूं इसलिये मेरे लिए देहावसान एक सहज परिवर्तन है जो कि कदाचित शोक का कारण नहीं है। हां, ये अवश्य होता है कि जब कभी अपने बुजुर्गों की खाली हुई कुर्सी देखते हैं तो किन्हीं प्रसंगों में उनकी कमी अखरती है लेकिन जीवन का पहिया निर्बाध गति से आगे बढ़ता रहता है।
जय जय भड़ास

mr yamraj ji ने कहा…

@ डॉ रूपेश श्रीवास्तव
उपरोक्त लिखे गये बेनामी कमेन्ट हमारे द्वारा नहीं लिखे गये है
@मुनव्वर सुल्ताना- आप का लिखना की हम ने अपनी दुकान शुरू की है , ये बात आप गलत प्रतीत नहीं होती , किर्पया आगे से इस तरह की बाते न करे , आगे आप यहाँ पढ़ सकते है

दीनबन्धु ने कहा…

मृत्यु के देवता श्री यमराज महाशय की हिंदी कितनी कच्ची है स्पेलिंग मिस्टेक खूब दिल खोल कर करते हैं। आप का लिखना की हम ने अपनी दुकान शुरू की है , ये बात आप गलत प्रतीत नहीं होती , किर्पया आगे से इस तरह की बाते न करे
मुनव्वर आपा से नाराज भी हो गए हैं लेकिन हिंदी में कच्चे होने के कारण कुछ का कुछ लिखते हैं आखिर उनकी भाषा तो संस्कृत है न....;)
बेनामी जी के अनुसार यदि मुनव्वर आपा मुस्लिम हैं तो आप यमराज जी तो उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकते मुसलमानों का डिपार्टमेंट अलग है वो आपके दायरे में नहीं आते।
जय जय भड़ास

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) ने कहा…

आप ये धर्म के साथ जुड़े लोगों ने कभी इंसानियत का पथ पढ़ा होता तो हमरी धरती जन्नत होती. इस धार्मिकता ने ही इस जन्नत को दोजख का जामा पहना दिया है. धार्मिक तांडव चे हो हिन्दू का हो या मुस्लिम का सिख का यस ईसाईयों का या फिर एनी सम्प्रदाय का हम बस इसका तिरस्कार करते हैं.

जय जय भड़ास

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