डा.रूपेश जी की माता जी की मृत्यु नैसर्गिक नहीं बल्कि अत्यंत क्रूर हत्या थी- भाग २

सोमवार, 6 दिसंबर 2010

पिछले आलेख से आगे की रहस्यमय हक़ीकत पढ़िये जो स्वयं भड़ास के संचालक डॉ.रूपेश श्रीवास्तव पर बीती है .........
तांत्रिक ने कहा कि तीन पपीते ले आइये जिनका वज़न चार किलो के आसपास हो यानि कि पर्याप्त बड़े हों। जाहिर सी बात है कि इतने बड़े पपीते सामान्यतः नहीं मिलते लेकिन हमारे महाभड़ासी डॉक्टर साहब के क्या कहने वाशी नई मुंबई के फल बाजार में जाकर कम से कम पच्चीस ट्रक छान मारे और तीन की बजाए छह पपीते लाकर रख दिये। अब उस तांत्रिक ने कहा कि आप पपीते लेकर मेरे घर आ जाइये मुझे उन फलों पर कुछ मंत्र पढ़ने हैं। दिन में साढ़े ग्यारह बजे से लेकर शाम साढ़े पाँच बजे तक पपीते उस तांत्रिक के घर रखे रहे। डॉ.रूपेश जी स्वयं अपने बड़े भाईसाहब के साथ इस काम में पूरे समय साथ रहे। शाम को पपीते लेने जाने पर डॉ.रूपेश ने आशंका व्यक्त करी कि भाई हो सकता है कि उसने कुछ कलाकारी कर के फलों के अंदर कुछ घुसा दिया हो लेकिन जब वे उसके घर पहुंचे तो उन्होंने पाया कि जिस तरह वे पपीते रखे छोड़ आए थे वे फल उसी तरह रखे थे लेकिन पपीते लेकर आते समय कहा कि इनका दोबारा वजन करा लेते हैं क्योंकि हर पपीते का वजन तो हमें पता ही है। भाई साहब ने कहा कि अगर इन फलों को काट कर इनमें कुछ घुसाया गया होता तो दोबारा चिपका देने पर हाथ में लेने पर ही वजन में अंतर महसूस होता चलकर इन्हें घर में टाँगते हैं व्यर्थ संदेह करके तौलने में समय मत नष्ट करो। ये भी सही था कि हमारे हाथ इतना अंतर तो महसूस कर ही सकते हैं। घर लाकर एक आलमारी में पपीते कहे अनुसार लटका दिये। और तीसरे दिन शनिवार को उस बंदे ने आकर ये कह कर उन पपीतों को काटा कि जो भी किया-कराया होगा वह इन फलों में देवी माँ की शक्ति से आ जाएगा। तीन चार पढ़े-लिखे लोग जिनमें कि बहन भारती सक्सेना, वरिष्ठ भड़ासिन बहन मुनव्वर सुल्ताना जी, बड़े भाई श्री भूपेश श्रीवास्तव और स्वयं डॉ.रूपेश अपना कैमरा लिये मौजूद थे। तांत्रिक ने कहा कि देखिए माँ की प्राणरक्षा के विषय में जो कर रहा हूं उसका फलदायी होना भगवान के हाथ है क्योंकि करे हुए मारण तंत्र की मुद्दत छह माह की थी जो कि कोजागिरी पूर्णिमा को समाप्त हो चुकी है अब सब कुछ ईश्वर के हाथ है। उसने पूजा-पाठ करते हुए तीनों पपीते भाईसाहब को लाने के लिये कहे जिन्हें भाईसाहब ने जब उतारा तो बताया कि इनका भार तो अधिक महसूस हो रहा है.............
आगे जानिए कि क्या हुआ इस पूरी प्रक्रिया में जो राक्षसी कर्म थी
जय नकलंक देव
जय जय भड़ास

5 टिप्पणियाँ:

Tarkeshwar Giri ने कहा…

are ee sahi kahani hai ya jhut

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

रोचक है कथा और जगाती है कौतूहल भी
मौक़ा मिला तो देखेंगे कटा हुआ फल भी

याद रखना ज़रूर हमको दोस्तों की तरह
भेज देना लिंक हमें बुलाना है गर कल भी

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

रोचक है कथा और जगाती है कौतूहल भी
मौक़ा मिला तो देखेंगे कटा हुआ फल भी

याद रखना ज़रूर हमको दोस्तों की तरह
भेज देना लिंक हमें बुलाना है गर कल भी

मनोज द्विवेदी ने कहा…

KITNE SACH AISE HAI JO HUM MARTE DUM TAK NAHI JAN PAYENGE. KITNE JHOOTH AISE HAI JINHE HAM SACH MAN BAITHE HAI AUR NA JANE KITNE SACH AISE HAI JO SAFED JHOOTH SE BHI JHOOTHE HAI...

मनोज द्विवेदी ने कहा…

AUR BHADAS KE MANCH PAR SAB SAF HO JATA HAI SACH AUR JHOOTH CLEAR HO JATA HAI....YE SACHCHAI BHI SAF HO JAYEGI.

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