प्रवीण शाह जी विमर्श आगे बढाइये और पिछली बातों पर गौर करें

बुधवार, 16 मार्च 2011

प्रवीण जी निवेदन करना चाहता हूं कि मैं स्वयं एम.डी., पी.एच.डी. हूं और अंधश्रद्धा निर्मूलन के तमाम कार्यक्रमों में डेमोन्सट्रेटर रह चुका हूं अपने कालेज के दौरान और इन कार्यक्रमों में हम सबके संरक्षक जिले के कलेक्टर हुआ करते थे। हाथ की सफ़ाई या इस तरह की ट्रिक्स में तो हमारे सारे ग्रुप को महारत हासिल थी। ये बात अलग है कि अब सब अपने अपने रोजी रोजगार परिवार में उलझ गए हैं।
एक विनती और है कि यदि अनूप मंडल ने एक भी बात असत्य लिखी होती तो मैं स्वयं उसका तत्काल खंडन कर देता। मैं संभावनाओं पर नहीं ठोस परिणामों के आधार पर जीवन को देखता हूं। मेरी निजी प्रयोगशाला रही है। यदि मुझे इस पूरे प्रकरण में तनिक भी श्रद्धा रही होती तो मैं हाथ जोड़ कर पूजा में बैठा होता न कि मूवी कैमरा लेकर वीडियो बना रहा होता।
अंतिम बात कि आप स्वयं पपीते पर ऐसा प्रयोग करके देख लीजिये या आपकी नजरों में कोई illusion artist हो जो कि मेरे ग्रुप के सामने ऐसा कर सके तो मैं इस वैश्विक मंच से उसे या आपको एक लाख रुपए का नगद प्रोत्साहन पुरस्कार देने की घोषणा करता हूं बस सारी परिस्थितियां पूर्ववत रहेंगी ये बात दीगर होगी कि इस बार कोई मरेगा नहीं, है न? मेरा ये पुरस्कार साइंस की तरक्की के लिये होगा न कि अंधश्रद्धा के पोषण के लिये।
जब तक कोई रहस्य नहीं खुलता वह जादू है जब खुल गया तो तर्कबद्ध तरीके से साइंस मे दर्ज़ हो जाता है। मैं प्रयोगवादी प्रकृति का हूं और इसके लिये साइंस के मौजूदा तरीकों को आजमाता हूं आपके पास यदि कुछ अधिक उन्नत तरीका हो तो अवश्य सूचित करें।
श्मशान में कौन क्या कर रहा है ये विमर्श का विषय होगा लेकिन फिलहाल नहीं। आशा है कि आप विषय को परिहास में न उड़ाएंगे।
सादर
जय जय भड़ास

3 टिप्पणियाँ:

प्रवीण शाह ने कहा…

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प्रिय व आदरणीय डॉ० रूपेश श्रीवास्तव जी,

मैं प्रवीण हूँ 'प्रवीश' नहीं...

मेरा मानना है कि आप उस समय ऐसी मनोस्थिति में नहीं थे कि चीजों को उनकी समग्रता में देख पाते...

एक लाख तो नहीं पर अपनी खून पसीने की कमाई में से पाँच हजार रूपये मैं भी उस तान्त्रिक को देने को सहर्ष तैयार हूँ जो मुम्बई के किसी ब्लॉगर भाई द्वारा किसी फल की दुकान से खरीदे पपीते में से पूर्ववर्णित माल निकाल दिखा सके... आप चाहें तो यह प्रयोग TSALIM के तत्वाधान में भी किया जा सकता है...

एक कदम और आगे जाते हुऐ मैं अपना फोटो, पहना हुआ वस्त्र व बाल भी देने को तैयार हूँ बशर्ते तय समय सीमा (एक माह) के अंदर कोई मुझे इस लोक से उबार दे... अपने मरणोपरांत लाभों में से उस शख्स को एक लाख रू० इन सेवाओं की एवज में देने का प्रबंध भी कर जाउंगा मैं...


...

प्रकाश गोविन्द ने कहा…

:))
प्रवीण जी के पांच हजार रुपये के साथ मेरी भी खून पसीने की कमाई के पचास हजार रुपये शामिल करें !
साथ ही चड्ढी, बनियाइन, रुमाल, मोजा और ऊपर नीचे के बाल भी हाजिर हैं

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

खुशी हुई कि शोध के विषय के लिये दी जाने वाली रकम में एक लाख मेरे + पांच हजार प्रवीण शाह जी के + पचास हजार प्रकाश गोविन्द जी के....
मैंने अभी तक चड्ढी आदि के साथ ऊपर+नीचे के बाल प्रस्तुत करने के विषय में विचार नहीं करा है। देखिए कि कितने और बुद्धिजीवी अपनी मेहनत की कमाई को "बिस सिद्धांत" और "डा.बंधु साहनी सिद्धांत" की दिशा में उन्नत शोध के लिए मार्ग प्रशस्त करने को आगे आते हैं। प्रकाश गोविन्द जी मैं गम्भीर हूं इसलिये कदाचित इस विषय पर आपकी तरह कसकर मुस्करा नहीं पा रहा हूं।
जय जय भड़ास

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