उर्दू के स्वयंभू मठाधीश ही उर्दू की कब्र खोद रहे हैं भाग - चार

शुक्रवार, 13 मई 2011

हाल ही में मुझे रेहान अन्सारी ने एक मेल भेजा है जिसमें इन महानुभाव ने अपनी विद्वता की उल्टियां करते हुए मुझे और डा.रूपेश जी के अलावा दो अन्य लोगों को बताने का प्रयास करा है कि इनकी महान खोज से उर्दू का कितना भला हो रहा है। मैं अब तक अपनी बात पर हूं क्योंकि खूब समझ रहा हूं इन महामक्कार और धूर्त लोगों की विनम्रता का ढकोसला। मोहतरमा ज़ैनब आपा ने मेरे पिछले आलेख मे टिप्पणी करी थी कि आखिर इन महान सज्जन(?) ने मेल में ऐसा क्या लिखा था जिसके कारण विवाद है। ज़ैनब आपा आप तो उर्दू भाषा और नस्तालिक लिपि की बखूबी समझ रखती हैं इसलिये प्रस्तुत कर रहा हूं। आप देख सकती हैं कि इस विनम्रता का शीर्षासन करते धूर्त की विनम्रता किस हद तक है कैसे ये आंखे बदलता है, अपनी गलती मानने की जगह निर्लज्ज की तरह अपशब्द लिख रहा है कि हमारे आदरणीय डा.रूपेश श्रीवास्तव का हाज़मा खराब है साथ ही लिखता है कि उन्होंने अपनी प्रसिद्धि के लिये इसकी निंदा करी है तो ये घमंडी आदमी ये नहीं जानता कि डा.रूपेश श्रीवास्तव किस तरह के इन्सान हैं कैसे उन्होंने उंगली पकड़ा कर लोगों को कम्प्यूटर पर काम करना सिखाया है, कैसे -मेल के ज़रिये से रख्शंदा अख्तर रिज़वी, मुनेन्द्र सोनी, मनीषा नारायण और जाने मुझ जैसे कितनों को चिट्ठाकारी सिखाई है। इन उर्दू की रोटी खाने वालों उर्दू को किस बुरी तरह से हानि पहुंचाई है ये मैं आगे लिखूंगा इस समय तो आप बस ये देखिये कि ये खुद कितना समझदार है।

शायद डाक्टर श्रीवास्तव फ़ौन्ट और टैक्स्ट का मतलव अलग-अलग समझते हों......... अब इन जैसे लोग आदरणीय डा.रूपेश श्रीवास्तव जी को बताएंगे कि टैक्स्ट क्या होता है और फ़ौन्ट क्या होगा है?


ये धूर्त कितनी महानता की उल्टियां कर रहा है ये आप देख सकती हैं लिखता है कि आइना बेचता हूं अन्धों के शहर में...... इसे उर्दू के लिये काम करने वाले और अपना समय और धन व्यय करने वाले अंधे प्रतीत होते हैं वैसे इसका करारा उत्तर आदरणीय डा.रूपेश श्रीवास्तव जी खुद ही दे चुके हैं जब इसके गिरोह के दुष्टों ने गाली-गलौज शुरू करा था।

तकनीक की उल्टियां करने वाले जरा ये तो देख ले कि तेरा पूर्ण विराम (.) किधर लगता है?? टैक्स्ट और फ़ौन्ट क्या है ये तुम जैसे मक्कारों ने कभी उर्दू वाले बेचारों को जानने ही नहीं दिया तुम्हें तो बस अपना सौफ़्टवेयर बेचना है।



हाज़मा तो अब तुम्हारा खराब हो रहा है तभी धोते फिर रहे हो मैं तुम्हारा चिट्ठा इसी जगह खोलूंगा। दोबारा मेल करने का दुःसाहस मत करना।

उर्दू के स्वयंभू मठाधीश ही उर्दू की कब्र खोद रहे हैं भाग - एक

उर्दू के स्वयंभू मठाधीश ही उर्दू की कब्र खोद रहे हैं भाग - दो

उर्दू के स्वयंभू मठाधीश ही उर्दू की कब्र खोद रहे हैं भाग -तीन


जय जय भड़ास

4 टिप्पणियाँ:

sanjay ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
sanjay ने कहा…

डा.रेहान अन्सारी से कहिए कि इस कमेंट बक्से में अपने ईजाद करे हुए फ़ौन्ट में लिख कर दिखाए। सुधर जाओ बनिया लोगों अब जागरूकता आ रही है जनसामान्य में...
जय जय भड़ास

मुनेन्द्र सोनी ने कहा…

अरे यार ये एक चिरकुट बनिया है जो अपनी फटी तेल से चीकट हुई गंध मारती बनियान को लिये हुए अपनी लीद मिली धनिया बेच रहा है। इसे टैक्स्ट और फौन्ट में अंतर नहीं मालुम तो आप लोग इससे क्या तर्क कर रहे है ये इस लायक नही है इसे माफ़ कर दो यारों...
जय जय भड़ास

Nizamuddin ने कहा…

Bhai, aap sabhi log padhe likhe hain, kuch ghalat fahmi huyee hogi, hum jaise seekhne walon ko bura lagta hai jab aap jaise sabhi acche padhe likhe log ladai karte hain, ladai mein kabhi kabhar aisi baatein bhi nikal aati hain jo naheen nikalni chahiye, please aap sabhi logon se guzarish hai ki aap log yeh ladai band krein please..., aap ke paas likhne ki bahut acchi taqat hai woh badi badi buraiyon se ladne ke liye istemal karein, Shukriyah

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