जैन धर्म के सही स्वरूप को जानिये

रविवार, 30 अक्तूबर 2011




जैन धर्म पूर्णतया अहिंसा पर आधारित है ऐसा प्रचार करा गया है जो कि निराधार व असत्य है ऐसा अनूप मंडल के लोगों ने आरोप लगाया है। मैं इस विषय में कुछ कह सकता हूँ तो ये कि कई जैन व्यवसायी अंडे, माँस निर्यात, मछली निर्यात, चमड़ा उत्पादन आदि से जुड़े हैं साफ़ बात है कि सीधी हिंसा(पशु हत्या) न करके उसकी प्रेरणा देकर या अन्य लोगों को उसकी आवश्यकता पैदा करके करवाते हैं ये इनकी अहिंसा है कि ये कत्लखानों(पशुवध गृह यानि स्लॉटर हाउस) में साझेदार रहने में व्यापार मानते हैं। ये तो रही अहिंसा अब आइये इनके नंगेपन पर जिसे ये धर्म से जोड़ते हैं जिसे इन्होंने हिन्दुओं में भी षड़यंत्रपूर्वक घुसा दिया है जिससे सनातन धर्म को मानने वाले हिंदू अनेक पंथों में बँट कर टूट चुके हैं। लीजिये प्रस्तुत हैं इनके संतों के दर्शन जिसे करके अमित जैन फूले नहीं समा रहे थे।
जय जय भड़ास

2 टिप्पणियाँ:

किलर झपाटा ने कहा…

प्यारे मुन्नू (मुनेन्द्र),
महाराजश्री विद्यासागर जी महाराज और अन्य जैन मुनियों का इस तरह से आपके द्वारा प्रस्तुतिकरण यह सिद्ध कर गया कि जो मन से निर्मल हैं वे बगैर वस्त्रों के भी नग्न नहीं हैं क्योंकि उनका अम्बर दिग दिगंत है। और जो आप जैसे विक्षिप्त प्रणाली के प्रयोजन हैं वे तन पर वस्त्र और तो और सर पर टोपी धारण करने के बावजूद भी पूर्णरूपेण नग्न हैं और संसार की समस्त प्रकार की बदबुओं से युक्त हैं।

यू टोपी-कपड़े वाला नंगे। छी: छी:
हा हा।

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) ने कहा…

नग्नता और निर्वस्त्रता के बीच अश्लीलता को वर्गीकृत करना एक विवेकशील व्यक्ति का कार्य है। बच्चे को दूध पिलाती माँ का खुला वक्ष अश्लील नहीं हो सकता वह तो एक निर्मल स्थिति है लेकिन वहीं बार नर्तकी का खुला हुआ वक्ष अश्लील लगता है। श्लील-अश्लील सत्यतः मनोस्थिति है उसे परिस्थिति से जोड़ना और जोड़ कर वक्तव्य देना कदाचित अनुचित हो सकता है। जैन मुनियों का नग्न रहना उनकी धार्मिक परंपरा का अंग होगा यह बाकी मत और सम्प्रदायों के लोगों के लिये स्वीकार्य नहीं होगा लेकिन जैन इसे कभी आपत्तिजनक नहीं मानते। ये तो स्वीकारने या न स्वीकारने की बात है हिंदू लोगों में एक विशेष साधु संप्रदाय भी नग्न रहता है जिन्हें नागा कहते हैं मैंने एक बार नासिक कुंभ के मेले में जाते हुए इनके जत्थे को देखा है।
जय जय भड़ास

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