आप वही अमित जैन हैं?
गुरुवार, 16 जून 2011
अमित भाई आपने यदि अपनी बात को चुटकुले या कार्टून के द्वारा कहा होता तो मैं समझ सकती थी कि आप वही अमित जैन हैं जो कि अपने नाम के आगे जोक्पीडिया लिखा करते हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि इस करतूत के पीछे वही तरीका हो जिसका खुलासा खुद आदरणीय बड़े भाई डॉ.रूपेश कर चुके हैं कि किस तरह से ब्लॉगर में जाकर अपने नाम की सेटिंग बदल कर प्रवीण शाह जी "शैतान" बन चुके हैं?? भाईसाहब ने तो बताया था कि सेटिंग में जाकर यदि नाम डॉ.रूपेश श्रीवास्तव लिख दिया जाए तो वह पोस्ट यह भ्रम पैदा कर सकती है कि ये गुस्से भरी अश्लील पोस्ट उन्होंने ही लिखी है। उम्मीद है आपको याद होगा। यदि सचमुच ये पोस्ट अमित जैन ने ही लिखी है तो वे अपनी नाराज़गी को खुद डॉ.रूपेश श्रीवास्तव के मोबाइल पर गालियाँ देकर व्यक्त कर सकते हैं आप जानते हैं उनका संयम। आपका एक प्यारा सा वीडियो आपको दिखाना चाहती हूं देखिये और बताइये कि क्या ये आपने ही गालियाँ दी हैं या कोई और है?
उनका मोबाइल नंबर है - 09224496555
जय जय भड़ास
चैत्यभूमि कहो या दैत्यभूमि दादर तो दादर ही रहने वाला है
शुक्रवार, 3 जून 2011
आजकल मुंबई में दादर का नाम बदलने की बड़ी उठापटक चल रही है। जिस राजनैतिक पार्टी को देखो वह इस बात के पीछे पड़ी है कि किस तरह कथित दलितों और अल्पसंख्यकों को अपने साथ रख सकें। अब ये महामूर्ख दलित और अल्पसंख्यक ये नहीं समझते कि दादर या किसी के फादर का नाम बदल देने से कुछ नहीं होता बल्कि अमल बदलने पड़ते हैं तरक्की के लिये। शिवसेना के साथ आठवले मिल गया तो सब बौखलाए हुए हैं कि कहीं कुछ राजनैतिक बदलाव न हो जाए। जब तक ये नाम बदलने की बकवास से ऊपर हमारे नागरिकों की सोच नहीं जाती कुछ नहीं बदलने वाला ये इन्हीं बातों पर वोट देते रहेंगे।
रही बात प्रवीण शाह या अमित जैन की तो वे शिखर पर बैठे धूर्त हैं जो भड़ास में घुस कर अपनी करतूतें करते रहते हैं। अमित जैन अपने कमेंट में लिखता है कि डा.रूपेश बड़े संयत आदमी हैं तो ये शायद यही परखना चाहता है कि किसमें कितना संयम है। अरे धूर्तों ! भड़ासी असंयमित नहीं हैं वरना भड़ास का अस्तित्त्व कबका बाजारू हो जाता। प्रवीण शाह, अमित जैन, गुफ़रान सिद्दिकी, रणधीर सिंह सुमन और डा.दिव्या श्रीवास्तव जैसे लोग जो कि अपनी धूर्तता के चलते ब्लागिंग में अपने लिबलिबे रीढ़विहीन विचार स्थापित करने के लिये लगे रहते हैं उन्हें हमारे जैसे भड़ासी कामयाब न होने देंगे। ये सारे बेनामी गालियाँ ही दे सकते हैं जैसा कि अभी डा.रूपेश जी ने एक स्क्रीन शॉट प्रस्तुत करा है। हम इन्हें इसी तरह पगला कर गालियाँ देने पर मजबूर करके ब्रेनहैमरेज कराते रहेंगे।
जय जय भड़ास
ज्यादा मक्कार कौन है ये उर्दू वाला रेहान अंसारी या फिर अमित जैन और प्रवीण शाह?
सोमवार, 16 मई 2011
ये समझ में नहीं आ रहा है कि ज्यादा मक्कार कौन है ये उर्दू वाला रेहान अंसारी या फिर अमित जैन और प्रवीण शाह?
जैसे अमित जैन को कई बार कहा कि तुम अपनी कथित तौर पर हटा दी गयी पोस्ट और अनूप मंडल के कमेंट के लिये गए स्क्रीन शॉट को दोबारा पोस्ट करे और अपनी बीवी के साथ वाली प्रोफ़ाइल तस्वीर भी भेजे लेकिन जब उसे खुद डा.रूपेश साहब ने कस कर खींचा तब जाकर उसने वह बात पोस्ट करी। तस्वीर अब तक नहीं दिखाई दुनिया को कि बीवी के साथ गलबहियाँ डाल कर पहले खुद फ़ोटो लगाएगा लेकिन जब पकड़ा जाए तो बीवी के अपमान का रोना रोने लगा और प्रवीण शाह ने भी उसके खूब आँसू पोंछे।
प्रवीण शाह डा.रूपेश तो लिख चुके हैं कि जो पोस्ट हटाने का आरोप तुम लगा रहे हो उन्हें पचासों बार क्यों नहीं पोस्ट करते। लज्जा आनी चाहिए जो कि डा.रूपेश जी पर स्मृतिलोप का आरोप लगा रहे हो लेकिन तुम ठहरे निरे बेशर्म....
जय जय भड़ास
सच्चे का बोलबाला झूठे का मुंह काला
शनिवार, 14 मई 2011
अमित जैन और प्रवीण शाह ने भड़ास पर आकर जिस तरह से दिल और दिमाग में अटकी बातों को निकाल कर मन हल्का कर लेने वाले मंच पर अपनी मक्कारियों के दस्त करे हैं उसे देख कर मन करा कि थोड़ा अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दूं। झाड़ू उठा कर मंच को साफ़ करना जरूरी था तो मैं बिना देर करे आ गया। प्रवीण शाह बौखला कर भड़ास पर सबको अनूप मंडल कह कर अपना मन हल्का कर रहा है और अमित जैन है कि अनूप मंडल और संजय कटारनवरे को भठियारिनों की तरह पानी पी-पी कर कोसने में लगा है। अब तो दोनो पर तरस आने लगा है। बेचारा प्रवीण शाह जितना हो सकता है अपनी तर्कशक्ति का प्रयोग करके संचालकों को ही अनूप मंडल का भाविक सिद्ध करने पर तुला है क्या करे और कुछ मार्ग ही नहीं दिख रहा है उसे। बड़े भइया डा.साहब ने इसके "शैतान", भूत, पिशाच बनने के सारे मुखौटे उतार कर असल चेहरा दिखा दिया कि सचमुच महागधे हो जैसा को संजय कटारनवरे ने बताया है। मुझे तो ये अनूप मंडल का भाविक कह चुका है अब संजय कटारनवरे को इसके बाद एक-एक करके बस खुद और अमित जैन को छोड़ कर सब भड़ासियों को अनूप मंडल का भाविक कह देगा, मजा आ रहा है इसकी छटपटाहट देख कर। तर्क की बात करने वाला ईश्वर विरोधी है यानि कि अगर ये जैन है तो मैं अनूप मंडल का भाविक.... है न मजेदार समीकरण।
बेचारा अमित अपनी हालत के लिये कार्टून इंटरनेट पर तलाश रहा होगा। जल्द ही अपनी सुलगती हुई पिछाड़ी लेकर टपकेगा। हम सब काले जादू और उसमें जैनों के योगदान पर चर्चा करें तो अच्छा रहेगा प्रवीण शाह और अमित जैन उस चर्चा में सक्रिय भाग ले सकेंगे सुबह से शाम और रात से सुबह तक "अंधविश्वास-अंधविश्वास" की माला का जाप करते हुए ;)
जय जय भड़ास
रणधीर सिंह सुमन क्या अब nice लिखना भी भूल गये खटीमा सम्मेलन के बाद???
शुक्रवार, 21 जनवरी 2011
सबको याद होगा कि जब जब भड़ास पर मुद्दों को किसी परिणाम कारक स्थिति में लाने तक का मौका लगा है वो लोग मुँह काला करके भाग जाते है जो विचार-वेश्याएं पहले भड़ास को अपना कोठा समझ कर लाली पाउडर लगा कर यहाँ से अपने लंपट ठरकी दुराचारी शोषक ग्राहकों को आवाज दिया करती थीं चाहे वो गुफ़रान सिद्दिकी हों,अमित जैन हों या रणधीर सिंह सुम न। ये वो लोग रहे जो कि भड़ास पर आकर राजनीति की कबड्डी खेल रहे थे
लेकिन जब इन्हें पटका रगेदा गया तो थोड़ी चूँ-चाँ करी और फिर अपना मुंह काला करके भाग गए। गुफ़रान सिद्दिकी इस्लाम की कट्टरता का गाना गाता था और रणधीर सिंह सुमन साम्यवाद की पिपिहरी फूंकता था अब तो ये गोंद खाकर मुंह चिपका कर बैठ गए हैं। रणधीर सिंह सुमन ने तो मुझे अपने किसी ऐसे प्रतिद्वन्दी की पहचान से जोड़ दिया था जिसने कभी इसको घसीटा होगा लेकिन अब तो ये उसकी पहचान बता कर nice लिखने भी नहीं आ पाता। अमित जैन भी अनूप मंडल के सामने आकर सीधी बात करने से कतरा कर भाग ही जाते हैं और महीनों गायब रहते हैं। ऐसे लोगों के साथ अन्य जगहों पर भी क्या होता है एक उदाहरण सामने पेश कर रहा हूं।जय जय भड़ास
संजय कटारनवरे
मुंबई Read more...

णमोकार महामंत्र 